Monday, June 8, 2009

नींद की गोली ले जा सकती है आत्महत्या की ओर


यदि आप सोने के लिए नींद की गोलियों पर निर्भर हैं तो सावधान हो जाइए। एक नए शोध में इस बात का खुलासा किया है कि जिन गोलियों की सहायता से लोग आराम की नींद लेते हैं, वह उन्हें आत्महत्या की ओर भी ले जा सकती है।
चीन में हुए इस शोध से यह बात सामने आई है कि जो उम्रदराज लोग सोने के लिए नींद की गोली लेते हैं, उनके आत्महत्या करने की आशंका चार गुना तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही शोध में यह भी पता चला कि तनाव को कम करने वाले और मानसिक बीमारियों में इस्तेमाल किए जाने वाले दवाओं के कारण भी रोगी में आत्महत्या की प्रवृत्ति उत्पन्न हो सकती है।
कैसे किया गया शोध
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने आत्महत्या की कोशिश कर चुके 85 महिला और पुरूषों का अध्ययन किया। शोध में शामिल सभी व्यक्ति 65 वर्ष से ज्यादा के थे। वैज्ञानिकों ने जब इसके रिकॉर्ड का अध्ययन किया तो पाया कि ये लोग नींद की गोली के आदी थे। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने जब गोली न लेने वाले उम्रदराज लोगों का अध्ययन किया तो उन्होंने पाया कि इनमें आत्महत्या कि प्रवृत्ति काफी कम थी।

Monday, June 1, 2009

शाही मेहमाननवाजी






राजा-रजवाड़ों के दौर में अतिथि का स्वागत काफी अहमियत रखता था।

अतिथि देवो भव: शायद यहीं ज्यादा लागू होता था। अब राज-पाट न रहने के बाद शाही घरानों ने अपने आरामगाह, महल, किले और हवेलियों को महंगे पांच सितारा हेरिटेज होटलों में तब्दील कर दिया है। आज भी यहां पहुंचकर उनकी परंपराओं, गर्मजोशी और खुसूस को आप महसूस कर सकते हैं।

गुजरे दौर में..

हेरिटेज होटल और हवेलियों में जाना अपने आप में बीते वक्त में जाने का टिकट मिल जाने जैसा है। इसलिए यहां आकर आप खुद को किसी रॉयल गेस्ट से कम मत समझिएगा।

यहां आर्किटेक्चर, फोटो, एंटीक सामानों का अथाह भंडार मिलेगा जो पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के रूप में आगे बढ़ रहा है। यकीन मानिए यहां की हर चीज इतिहास का एक अलग ही नजारा पेश करती है। इंडियन रॉयलटी यहां हर चीज से झलकती है।

राजा की तरह भोज

अगर जयपुर के रामबाग पैलेस की ही बात की जाए, तो यहां आकर कौन नहीं चाहेगा राजे-रजवाड़ों की तरह बैठकर भोजन करना। इतना ही नहीं खूबसूरत गार्डन में शैंपेन का लुत्फ, विंटेज कार में शहर की शाही सैर, रॉयल किचन और मल्टी क्यूजीन मैन्यू अपने आप में ना भूल पाने वाला अनुभव साबित होता है।

ख्वाबनुमा विवाह

वेडिंग प्लानर्स के लिए हवेलियां और महल ड्रीम वेडिंग की तरह हो सकते हैं। बशर्ते आपका बजट अरुण नायर-लिज हर्ले या फिर संत सिंह चटवाल की तरह हो। सोचकर देखिए कि आप ऐसी जगह शादी कर रहे हैं जहां किसी जमाने में महान गायक, संगीतज्ञ, कवियों और लेखकों ने शिरकत की होगी।

लग रहा है न कि आप राजा-रानी बन गए हैं। यह यकीनन आपकी जेब को हल्का जरूर करेगा, लेकिन यादों में आप इतिहास को कैद कर चुके होंगे।

कुछ स्पेशल

उदयपुर लेक पैलेस में आपको पूरी रात के लिए गणगौर बोट किराए पर मिल सकती है। इसमें शेफ, वेटर, बार सर्विस और लाइव म्यूजिक भी साथ मिलता है।

मैसूर महाराजा द्वारा निर्मित ललिता महल भारत के सबसे रॉयल गेस्ट वॉइसरॉय ऑफ इंडिया का मेजबान रह चुका है। आप भी इस कतार में शामिल हो सकते हैं।

इनमें से कुछ होटल स्पा की सुविधाएं भी मुहैया करवाते हैं।

इनमें से कुछ हवेलियों में उनके असली मालिक आज भी निवास करते हैं।

कहां-कौनसी रॉयल ट्रीट

ताज लेक पैलेस, उदयपुर

रामबाग पैलेस, जयपुर

उम्मेद भवन पैलेस, जोधपुर

ऊषा किरण पैलेस, ग्वालियर

ताज हीरामहल, जोधपुर

बोलगट्टी पैलेस, कोच्ची

त्रावणकोर रिजॉर्ट, तिरुवंतपुरम

ललिता पैलेस, मैसूर

जय महल पैलेस, जयपुर

देवगढ़ पैलेस होटल, जयपुर

Tuesday, May 26, 2009

मुझसे ही है मेरी पहचान


एक ही परिवार में जब बेटी और बेटे दोनों का जन्म होता है तो माता-पिता बडे प्यार से अपने बच्चों के लिए नाम का चुनाव करते हैं। फिर ताउम्र वही नाम बच्चे के लिए उसकी पहचान बन जाता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि शादी के बाद लडकी को अपने पिता का सरनेम छोडकर अपने नाम के साथ पति का नाम या उपनाम लगाना पडता है, जबकि लडके के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती। पहले किसी स्त्री ने इस परंपरा पर कोई सवाल नहीं उठाया कि ऐसी परंपरा केवल स्त्रियों के लिए ही क्यों है? लेकिन अब भारतीय स्त्री के मन में यह सवाल सुगबुगाने लगा है। उसके मन में इस बात को लेकर बहुत व्याकुलता है कि उसके साथ ही यह भेदभाव क्यों किया जाता है? इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए हमें एक बार भारतीय समाज के अतीत में झांक कर देखना होगा कि स्त्री के साथ इस भेदभाव के लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं।